12 साल का बालक,12 घण्टे तक शव को रखा बंदिस्त,12 हजार रुपए देने पर शव किया रिहा…..नागपुर में शर्मशार करने वाली घटना..!
एंबुलेंस चालक ने कमीशन के चक्कर मे किमया अस्पताल में लाकर ली बालक की जान…परिवार का आरोप…!
बोला था एम्स,चालक लेकर गया किमया अस्पताल…बिल भुगतान के लिए रखा 12 घण्टे शव
नागपुर 11 अक्तूबर 22 – मंगलवार को खारी गाव जिला बरहानपुर से अमरावती आते समय साला जीजा की बलगाव मे बाइक फिसलने से दिनांक 6 अक्तूबर को दुर्घटना हुई। उमेश मारोती चव्हाण पाथरगाव तहसील चांदूर रेल्वे जिला अमरावती निवासी अपने ससराल गया था।12 साल का बालक,12 घण्टे शव रखा बंदिस्त,12 हजार रुपये देने पर किया रिहा..यह शर्मशार करने वाली घटना घटी है उपराजधानी में।

बरहापुर से वापस लौटते वक्त बलगाव अमरावती हादसा हुआ।जिसमें उमेश का साला विकास सुधाकर राठौड़ उम्र 12 के सर व छाती पर गंभीर चोट आई।उसे अमरावती के पंजाबराव देशमुख़ अस्पताल में प्राथमिक उपचार के लिए भेजा गया।तबियत ज्यादा होने से उसे नागपुर भेजा गया।अमरावती से एक एंबुलेंस कर नागपुर लाया गया।रिश्तेदार में एंबुलेंस वाले को एम्स में लाने को कहा लेकिन एम्बुलेन्स वाले ने अपने कमीशन के चक्कर मे किमया मल्टीस्पेशालिस्ट अस्पताल गांधी बाग में लाया गया।गाव खेड़े के लोग होने से उन्हें नागपुर का कोई पता नही।एम्बुलेन्स वाले ने रिस्तेदारो की न मानते हुए किमया में आखिर क्यों लाया यह सवाल उठ रहा है।

विकास को बुधवार दिनांक 7 अक्तूबर को दोपहर 1 बजे किमया अस्पताल में लाया गया।उपचार के दौरान ही विकास की मृत्य मंगलवार को सुबह 4 बजे होने की जानकारी मिली।परिवार ने 46650 /- हजार रुपए बिल का भुगतान करने के बावजूद 55 हजार रुपए का बिल थमा देने की जानकारी परिवार ने दी।इतना ही नही विकास के मृत्यु के बाद दवाइयों की चिट्ठी भी लिखकर दी लेकिन परिवार ने दवाई नही लाई क्यो की मृत्यु के बाद दवाई किस काम की।
विकास के माता पिता भहुत गरीब है उनके मृत्यु से दोनों सदमे में गए।किमया निजी अस्पताल ने उपचार के पहले कितना भुगतान होंगा यह बताया नही।फिर भी गरीबी में भी बच्चे की जान बचाने के लिए हजारों रुपए उपचार खर्च कोई आखिर विकास की जान डॉक्टर नही बचा पाए।अब विकास के उपचार का अतिरिक्त 55 हजार रुपए होने की जानकारी डॉ. प्रशांत वानखड़े डायरेक्टर किमया अस्पताल ने दी।सुबह चार बजे से लेकर दिनभर विकास का पूरा परिवार उसका शव लेने के लिए बैठे रहे।लेकिन जबतक बिल का भुगतान नही तबतक शव नही यह अमानवीय भूमिका अस्पताल संचालक की दिखाई दी।

परिवार का आरोप है कि एम्बुलेन्स चालक की वजहसे ही बच्चें की जान गई।यहाँ पर न लाते हुए एम्स या मेडिकल अस्पताल में ले चलते तो जान बच सकती थी।केवल अपने कमीशन के लिए यहां पर भर्ती करने लगाया ।किमया के डॉक्टरों ने भी उपचार में काफी हलगर्जी करने का आरोप परिवार ने लगाया।अब उनके पास भुगतान के लिए एक फूटी कवडी भी नही है।नाही गाव तक शव ले जाने के लिए पैसे।उनकी मांग है कि हमारे बच्चों की बॉडी दे दिया जाए हमे कोई आपत्ति नही है।लेकिन अस्पताल संचालक पैसे पर अड़े दिखाई दे रहे है।अब बच्चों को अस्पताल में ही छोड़कर परिवार गाव की और निकलने की तैयारी में है।ऐसा यदि हुआ तो डॉक्टर व एम्बुलेन्स चालक पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।आखिर डॉक्टर ने 12 घण्टे के बाद 12 हजार रुपये लेकर परिवार को विकास का शव दिया। गणेश पेठ पुलिस स्टेशन के सेकंड पीआई राऊत ,पीएसआई मनीषा गोंड अस्पताल पहुंचकर मामले को शांत किया।
इस संदर्भ में जानकारी के लिए अस्पताल के डॉक्टर प्रशांत वानखड़े को फोन करने पर फोन रिसीव नही किया वही वाट्सअप पर जानकारी मांगने पर जवाब नही दिया।विकास का शव 5 बजे मेओ अस्पताल में पीएम के लिए पुलिस ले गई।7 दीन से मृतक विकास का पूरा परिवार ने परेशानी झेली।विकास का मामा नरसिंग जाधव ने बताया कि मेरे भांजे की जान एंबुलेंस व डॉक्टर के लापरवाई से हुई है।पैसे देने के बाद बड़ा बिल निकाला व 12 घण्टे शव को नही दिया मैने 12 हजार रुपए देने के बाद शव को दिया।ऐसे लोगो पर कार्रवाई की मांग जाधव ने की।परिवार ने डॉक्टर व पत्रकारो का शुक्रिया अदा किया।
