जानें, किसने दी ‘राज- उद्धव को चुनौती

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एडवोकेट सदावर्ते ने कहा– विरोध मार्च नहीं दूंगा’ , मनसे आगबबूला
मुंबई.
महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों में पहली कक्षा से त्रिभाषा फॉर्मूले के तहत हिंदी भाषा को लागू करने के फैसले का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने कड़ा विरोध किया है। इसी मुद्दे को लेकर राज ठाकरे ने 5 जुलाई को मुंबई में मोर्चा निकालने की घोषणा की है। राज ठाकरे ने सभी विपक्षी दलों से इस मोर्चे में शामिल होने की अपील की है, जिसे शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने स्वीकार कर लिया है। वहीं, हिंदी पढ़ाने के विरोध में निकाले जा रहे इस मोर्चे पर सवाल भी उठ रहे है।

गुणरत्न सदावर्ते का कड़ा विरोध
हिंदी विरोध मोर्चे पर एडवोकेट गुणरत्न सदावर्ते ने तीखा विरोध जताते हुए कहा, “राज और उद्धव ठाकरे का यह मार्च सिर्फ दिखावा है। मैं इसे नहीं निकलने दूंगा।” उन्होंने कहा कि जो नियम आम नागरिकों पर लागू होते हैं, वही नियम नेताओं पर भी लागू होने चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बच्चों को हिंदी सिखाना उनके भविष्य के लिए जरूरी है, न कि किसी भाषा पर हमला है।

विवाद पैदा करने की कोशिश
उन्होंने आरोप लगाया कि राज ठाकरे भाषा और संप्रदाय के नाम पर विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मोर्चे के जरिए वे कुछ हलचल मचाना चाहते हैं। इसलिए राज ठाकरे को इस मोर्चे की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और पुलिस को उन्हें रोकते हुए हिरासत में लेना चाहिए। इस बयान के बाद मनसे ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी और सदावर्ते को सीधे पीटने की धमकी दे डाली है।

मनसे ने दी धमकी
सदावर्ते के विरोध के बाद मनसे आग बबूला हो गई है। पार्टी नेता अविनाश जाधव ने कहा, “सदावर्ते बीजेपी के पाले हुए व्यक्ति हैं। वह मराठी लोगों के खिलाफ काम करते है, उन्हें घर से बाहर नहीं जाने देंगे। एक दिन मराठी जनता खुद उन्हें सबक सिखाएगी। मैं बीजेपी से अनुरोध करता हूं कि उन्हें चुप करायें नहीं तो उनके मुंह में दांत नहीं बचेंगे।”

20 साल बाद साझा करेंगे राजनीतिक मंच
महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह मामला अब सिर्फ शिक्षा नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मराठी अस्मिता और राजनीतिक वर्चस्व का मुद्दा बन चुका है। 5 जुलाई को होने वाला मार्च मनसे के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। इस मार्च में 20 साल में पहली बार उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ नजर आने वाले हैं।

जगह और समय पर चर्चा जारी
हिंदी को स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाने के खिलाफ दोनों नेताओं ने पहले अलग-अलग दिन विरोध प्रदर्शन करने कि घोषणा की थी। राज ठाकरे ने 6 जुलाई को जबकि उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे 7 जुलाई को विरोध मार्च निकालने वाले थे। लेकिन राज ठाकरे ने सामने आकर संजय राउत को फोन किया और एक ही मार्च निकालने के लिए कहा। जिसके बाद राउत ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से चर्चा की और फिर 5 जुलाई को एक साथ मार्च निकालने पर सहमति बनी। हालांकि इस रैली की जगह और समय पर अभी चर्चा चल रही है।

दोनों भाई दिखेंगे साथ
गौरतलब हो कि इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को एक साथ देखा जा सकता है। 2006 में राज ठाकरे ने अपने चाचा बालासाहेब ठाकरे कि शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया। उसके बाद से दोनों भाई कभी भी राजनीतिक मोर्चे पर एक साथ नजर नहीं आये। मनसे के गठन के बाद भी राज ठाकरे ने मराठी मानुष का मुद्दा उठाया था और अपनी सियासी जमीन बनाने के लिए उत्तर भारतीयों के खिलाफ उग्र आंदोलन चलाया था। इसका उसे बाद के कुछ चुनावों में फायदा भी मिला था।

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