महिला पत्रकार की शिकायत पर FIR क्यों नहीं? नागेश तितरमारे को लेकर उठे सवाल!चर्चा में मामला, पुलीस पर भी उठ रहें सवाल! प्रेस क्लब डिजिटल का बताता है सदस्य!

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महिला पत्रकार की शिकायत पर FIR क्यों नहीं? नागेश तितरमारे को लेकर उठे सवाल!चर्चा में मामला, पुलीस पर भी उठ रहें सवाल! प्रेस क्लब डिजिटल का बताता है सदस्य!
नागपुर क्राईम ब्युरो | महिला पत्रकार के साथ कथित मानसिक प्रताड़ना, आपत्तिजनक व्यवहार और बदनाम करने की धमकी देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में महिला पत्रकार ने नागेश तितरमारे के खिलाफ सदर और वाडी पुलिस थाने में शिकायत देकर निष्पक्ष जांच एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी  है।

महिला पत्रकार ने शिकायत में क्या आरोप लगाए?
22 अक्टूबर 2026 को दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता का आरोप है कि नागेश तितरमारे सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करता हैं तथा आपत्तिजनक टिप्पणियों के माध्यम से उन्हें मानसिक रूप से परेशान करता हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नागेश तितरमारे ने महिला पत्रकार पर OYO होटल जाने के लिए दबाव बनाया और इनकार करने पर उन्हें बदनाम करने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने कथित घटनाओं के कारण अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

प्रेस क्लब डिजिटल मीडिया का बताता सदस्य  और पुलिस अधिकारियों से कथित नजदीकी पर सवाल!
नागेश तितरमारे स्वयं को प्रेस क्लब डिजिटल मीडिया का सदस्य बताता हैं और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से अच्छे संबंध होने का दावा करता हैं।सीपी से अच्छे संबंध है ऐसा बताकर अपनी बात रखता है.शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वे पुलिस अधिकारियों से कथित नजदीकी का हवाला देकर अपना प्रभाव प्रदर्शित करने का प्रयास करता हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि  पुलिस प्रशासन से किया जाना आवश्यक है।

प्रेस क्लब डिजिटल मीडिया की सदस्यता और किसी पुलिस अधिकारी से परिचय होना अपने आप में किसी गलत कार्य का प्रमाण नहीं है। सवाल यह है कि क्या इन कथित संबंधों या प्रभाव का इस्तेमाल किसी महिला पत्रकार पर दबाव बनाने के लिए किया गया? इसका जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस आयुक्त की पत्रकार परिषद में बैठने की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा!
नागेश तितरमारे पुलिस आयुक्त की पत्रकार परिषद में ऐसी जगह बैठता हैं, जहां आमतौर पर पत्रकारों के बैठने की व्यवस्था नहीं होती. इस तरह वे पुलिस अधिकारियों से अपनी नजदीकी प्रदर्शित करने का प्रयास करता हैं।
हालांकि, बैठने की व्यवस्था या किसी अधिकारी से परिचय के आधार पर किसी व्यक्ति के प्रभाव अथवा अनुचित आचरण का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है।

महिला पत्रकार की गंभीर शिकायत के बाद FIR दर्ज क्यों नहीं?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल पुलिस की कार्रवाई को लेकर है। महिला पत्रकार ने लिखित शिकायत देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस ने शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की है और क्या FIR दर्ज की गई है।नहीं की तॊ क्यों नहीं की?
यदि FIR दर्ज नहीं हुई है, तो शिकायत की वर्तमान स्थिति क्या है? क्या शिकायत की जांच की जा रही है? क्या शिकायतकर्ता को आगे की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई है?
कानून के अनुसार, संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस को लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करनी होती है। शिकायत में वर्णित तथ्यों और आरोपों की प्रकृति के आधार पर उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR दर्ज होने या न होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है।

क्या महिला पत्रकार को न्याय मिलेगा? पुलिस प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण!
शिकायतकर्ता ने संबंधित व्यक्ति के पूर्व पुलिस रिकॉर्ड और उसके खिलाफ पहले की गई शिकायतों की भी जांच करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने तथा अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी महिला पत्रकार के साथ अनुचित व्यवहार या धमकी की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।


पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील की भूमिका पर नजर!
अब इस मामले में पुलिस प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। शिकायत पर की गई कार्रवाई, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शहर में झुठे एफ आई आर तॊ जल्दी होते लेकिन इस महिला के शिकायत पर एफ आई आर क्यों नहीं? यह चर्चा पुरे शहर में जोरो से चल रही है. अब देखना है की महिला पत्रकार को न्याय मिलता या नागेश तितरमारे का पुलीस संरक्षण करती इसकी और सभी की नजरे लगी है.

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