महाबोधि महाविहार आंदोलन को लेकर विजय बौद्ध ने उठाए सवाल!
क्या भंते विनाचार्य पर लगाए जा रहे आरोप महाबोधि महाविहार आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हैं?
भोपाल,WH NEWS मध्य प्रदेश। बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार की व्यवस्थाओं एवं उसके बौद्ध विरासत से जुड़े आंदोलन को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। भोपाल के वरिष्ठ बौद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं दि बुद्धिस्ट टाइम्स के संपादक तथा पूर्व राष्ट्रीय सचिव, बौद्ध धम्म संसद, बोधगया विजय बौद्ध ने प्रेस नोट जारी कर भंते विनाचार्य पर लगाए जा रहे विभिन्न आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग के साथ-साथ यह सवाल उठाया है कि कहीं इन आरोपों के माध्यम से महाबोधि महाविहार आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है।

विजय बौद्ध के अनुसार, भंते विनाचार्य बोधगया महाबोधि महाविहार आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उनका दावा है कि महाबोधि महाविहार में कथित कर्मकांड, अंधविश्वास एवं गैर-बौद्ध धार्मिक परंपराओं के विरोध को लेकर भंते विनाचार्य ने खुलकर अपनी बात रखी थी।
उन्होंने अपने प्रेस नोट में कहा कि आंदोलन के दौरान महाराष्ट्र से पहुंचे बौद्ध अनुयायियों एवं महिलाओं के साथ कथित विवाद और हिंसक घटनाओं के बीच भंते विनाचार्य ने उनका बचाव किया और इसी प्रकरण में उन्हें जेल जाना पड़ा। विजय बौद्ध का आरोप है कि उस समय उनके विरुद्ध कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा न्यायालयीन निष्कर्ष के संबंध में प्रेस नोट में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है।
विजय बौद्ध का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद नागपुर सहित महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भंते विनाचार्य का बौद्ध समाज द्वारा स्वागत किया गया। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि उनके समर्थकों के बीच उन्हें आंदोलन के महत्वपूर्ण कार्यकर्ता के रूप में स्वीकार किया जाता रहा है।
आरोपों की सत्यता पर कानूनी प्रक्रिया जरूरी!
भंते विनाचार्य पर लगाए जा रहे कथित यौन शोषण, बलात्कार, आर्थिक अनियमितता अथवा चंदा संग्रह से संबंधित आरोपों को लेकर विजय बौद्ध ने सवाल उठाया है कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसे गंभीर आरोप हैं, तो संबंधित शिकायतकर्ता को कानून के तहत पुलिस अथवा सक्षम न्यायिक संस्था के समक्ष शिकायत दर्ज करानी चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।सोशल मीडिया पर चर्चा कर समाज की और भिक्षु की बदनामी रोके.
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को केवल सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। किसी व्यक्ति के अपराधी होने का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
साथ ही, विजय बौद्ध ने यह भी कहा कि यदि भंते विनाचार्य के विरुद्ध कोई ठोस शिकायत या आपराधिक मामला है, तो संबंधित एजेंसियों को उसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि गंभीर आरोपों की स्थिति में सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय कानून का रास्ता अपनाना उचित होगा।
राजनीतिक नेताओं से मुलाकात पर भी उठे सवाल!
विजय बौद्ध ने कहा कि यदि कोई बौद्ध भिक्षु अपने धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष या विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करता है, तो मात्र मुलाकात के आधार पर उसके उद्देश्य या विचारधारा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि भंते विनाचार्य एवं उनके समर्थकों ने सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले से मुलाकात की थी। इसी प्रकार बोधगया महाबोधि महाविहार से संबंधित मांगों को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी सहयोग की मांग की गई थी।
विजय बौद्ध के अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी मांग रखना संवैधानिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए केवल राजनीतिक नेताओं से मुलाकात को आधार बनाकर किसी व्यक्ति को किसी संगठन का एजेंट बताना उचित नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप रोकने की अपील!
विजय बौद्ध ने कहा कि बौद्ध समाज के विभिन्न संगठनों एवं नेताओं को आपसी मतभेदों को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप में बदलने के बजाय महाबोधि महाविहार से जुड़े मूल मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध बलात्कार, यौन शोषण, आर्थिक धोखाधड़ी अथवा अन्य किसी अपराध के प्रमाण हैं, तो संबंधित व्यक्ति को कानून के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं हैं, तो बिना प्रमाण किसी व्यक्ति को अपराधी बताना उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है।
आंदोलन को लेकर एकजुटता की अपील!
विजय बौद्ध ने बौद्ध समाज, भिक्षुओं, बौद्ध विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि व्यक्तिगत विवादों से ऊपर उठकर महाबोधि महाविहार से जुड़े ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्रबंधन संबंधी मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाए।
उन्होंने कहा कि महाबोधि महाविहार बौद्ध समाज की ऐतिहासिक विरासत है और इससे जुड़े किसी भी विवाद का समाधान लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं कानूनी तरीके से होना चाहिए।
उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि आपसी आरोप-प्रत्यारोप और संगठनात्मक मतभेदों के कारण कहीं महाबोधि महाविहार से जुड़े व्यापक आंदोलन को नुकसान न पहुंचे।
विजय बौद्ध ने सभी पक्षों से अपील की कि यदि किसी के पास भंते विनाचार्य अथवा किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध गंभीर आरोपों के प्रमाण हैं, तो उन्हें संबंधित जांच एजेंसी अथवा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। साथ ही उन्होंने बौद्ध समाज से महाबोधि महाविहार के मुद्दे पर व्यापक एवं शांतिपूर्ण जनसंगठन की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
विजय बौद्ध ने अंत में कहा कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के बजाय बौद्ध समाज की ऐतिहासिक विरासत और महाबोधि महाविहार से जुड़े मूल प्रश्नों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
