‘औकात’ न होने से मनपा आइसोलेशन अस्पताल की जमीन निजी संस्था को! भाजपा नगरसेवक दिलीप दिवे के बयान पर सभागृह में हंगामा; महापौर ने ‘औकात’ शब्द कार्यवाही से हटाया

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‘औकात’ न होने से मनपा आइसोलेशन अस्पताल की जमीन निजी संस्था को!
भाजपा नगरसेवक दिलीप दिवे के बयान पर सभागृह में हंगामा; महापौर ने ‘औकात’ शब्द कार्यवाही से हटाया

नागपुर,WH NEWS- नागपुर महानगरपालिका और चैरिटी संस्था के बीच पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के आधार पर मौजा जाटतरोडी स्थित आइसोलेशन हॉस्पिटल परिसर की कुल 10,496.50 वर्ग मीटर जमीन में से 2,690 वर्ग मीटर जमीन इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर के निर्माण के लिए नाममात्र 1 रुपये प्रति वर्गफुट प्रति वर्ष की दर से 30 वर्षों के लिए लीज पर देने का प्रस्ताव सोमवार को मनपा सभागृह में रखा गया। सत्तापक्ष के इस प्रस्ताव का विपक्षी नगरसेवकों ने जोरदार विरोध किया।’सत्ताधीश’में प्रकाशित इस खबरें से नागपूर में चर्चा का विषय बना.
विपक्ष के नेता संजय महाकाळकर ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण और बेशकीमती जमीन किसी निजी संस्था को देने के बजाय मनपा को स्वयं यहां स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करना चाहिए। इसके जवाब में पूर्व शिक्षा सभापति एवं भाजपा नगरसेवक दिलीप दिवे ने कहा कि मनपा के पास ऐसा केंद्र चलाने की ‘औकात’ नहीं है। उनके इस बयान के बाद सभागृह में जोरदार हंगामा हुआ।

संजय महाकाळकर सहित विपक्षी नगरसेवकों ने दिवे के इस कथित असंवैधानिक शब्द पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद महापौर ने ‘औकात’ शब्द को सभागृह की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। दिलीप दिवे ने भी कहा कि वह उक्त शब्द वापस लेते हैं।
हालांकि, इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर की आवश्यकता बताते हुए दिलीप दिवे ने नागपुर की बढ़ती आबादी और निजी क्षेत्र में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी सभागृह के सामने रखी। इसी दौरान उन्होंने मनपा की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए मनपा की ‘औकात नहीं’ होने की बात कही, जिसके बाद विपक्षी सदस्यों में तीव्र नाराजगी देखी गई।
सिम्बायोसिस को 75 एकड़ जमीन देने पर सवाल
विपक्ष के नेता संजय महाकाळकर ने भांडेवाड़ी की करीब 75 एकड़ बेशकीमती जमीन सिम्बायोसिस जैसी वैश्विक शैक्षणिक संस्था को मात्र 1 रुपये के नाममात्र शुल्क पर दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि इससे नागपुर और विदर्भ के विद्यार्थियों को वास्तव में कितना लाभ मिला?
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या समझौते के अनुसार नागपुर और विदर्भ के विद्यार्थियों के लिए 25 प्रतिशत प्रवेश वास्तव में आरक्षित किया जाता है?

इस पर नगरसेवक बंडू राऊत ने कहा कि अन्य विद्यार्थियों से सिम्बायोसिस करीब 26 लाख रुपये प्रवेश शुल्क लेती है, जबकि नागपुर और विदर्भ के विद्यार्थियों से 18 लाख रुपये शुल्क लिया जाता है। इस बयान पर महाकाळकर सहित विपक्षी नगरसेवकों ने व्यंग्यात्मक रूप से तालियां बजाईं।
विकी कुकरेजा ने किया प्रस्ताव का समर्थन
भाजपा नगरसेवक विकी कुकरेजा ने इस बहस में हस्तक्षेप करते हुए सिम्बायोसिस जैसी विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्था को नागपुर लाने के लिए केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पहले नागपुर और विदर्भ के विद्यार्थी शिक्षा के लिए पश्चिम महाराष्ट्र जाते थे, लेकिन अब उन्हें नागपुर में ही बेहतर शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं।
कुकरेजा ने कहा कि नेताओं ने अच्छा काम किया है और इसका लाभ नागपुर के विद्यार्थियों को मिल रहा है। उन्होंने इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रस्ताव को भी मंजूरी देने की मांग महापौर से की।

पांच संस्थाओं ने लिया था निविदा प्रक्रिया में हिस्सा
दिलीप दिवे ने बताया कि इस प्रकल्प के लिए विस्तृत निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी और कुल पांच संस्थाओं ने इसमें भाग लिया। इनमें मेसर्स स्व. भानुताई गडकरी मेमोरियल के साथ मेसर्स मानस एग्रो इंडस्ट्री एंड इंफ्रा. लिमिटेड तथा श्री भवानीमाता सेवा समिति की निविदाएं भी शामिल थीं।
आर्थिक निविदाओं के परीक्षण के अनुसार, मेसर्स स्व. भानुताई गडकरी मेमोरियल के साथ मेसर्स मानस एग्रो इंडस्ट्री एंड इंफ्रा. लिमिटेड ने CGHS दर पर 22 प्रतिशत छूट देने की पेशकश की और उसे सर्वाधिक यानी H-1 निविदाकार घोषित किया गया। संबंधित प्रस्ताव प्रकल्प विभाग द्वारा स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

30 साल के लिए 1 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से जमीन
प्रस्ताव के अनुसार यह जमीन मनपा के स्वामित्व की है। नागपुर शहर के मंजूर विकास आराखड़े के अनुसार संबंधित जमीन आइसोलेशन हॉस्पिटल के लिए आरक्षित है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस जमीन को नाममात्र दर पर 30 वर्षों के लिए लीज पर देने का विषय स्थायी समिति के समक्ष रखा गया था, जिसे समिति ने सर्वसम्मति से मंजूर कर अंतिम मंजूरी के लिए मनपा सभागृह के समक्ष प्रस्तुत किया।
आइसोलेशन हॉस्पिटल की कुल जमीन में से 2,690 वर्ग मीटर क्षेत्र इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर के निर्माण, संचालन, रखरखाव और प्रबंधन के लिए दिया जाना है। इसमें भवन निर्माण, आवश्यक उपकरण, डॉक्टरों और विशेषज्ञों की नियुक्ति तथा केंद्र के संचालन का खर्च संबंधित संस्था द्वारा उठाया जाएगा।

इसके बदले मेसर्स स्व. भानुताई गडकरी मेमोरियल के साथ मेसर्स मानस एग्रो इंडस्ट्री एंड इंफ्रा. लिमिटेड को यह जमीन 1 रुपये प्रति वर्गफुट प्रति वर्ष की दर से 30 वर्षों के लिए लीज पर देने का प्रस्ताव रखा गया।
हंगामे के बीच प्रस्ताव मंजूर
विपक्षी नगरसेवकों ने इतनी महत्वपूर्ण जमीन को जल्दबाजी में निजी संस्था को देने का विरोध करते हुए कहा कि पहले इस संबंध में स्पष्ट नीति तय की जानी चाहिए। संजय महाकाळकर सहित विपक्षी सदस्यों ने प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
हालांकि भाजपा नगरसेवक विकी कुकरेजा ने इसे जनहित का अच्छा प्रस्ताव बताते हुए इसका समर्थन किया। अंततः भारी हंगामे के बीच प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। जिस तरह से यह प्रस्ताव हंगामे के बीच पारित हुआ, उससे विपक्ष ने लोकसभा में हंगामे के बीच विधेयक पारित किए जाने की प्रक्रिया की तुलना की।

‘स्वास्थ्य सेवा’ के नाम पर जमीन देने का विरोध
विपक्ष ने आरोप लगाया कि मनपा का एक और महत्वपूर्ण भूखंड स्वास्थ्य सेवा के नाम पर केंद्रीय मंत्री से जुड़ी निजी संस्था को दिया जा रहा है। विपक्षी नगरसेवकों ने इस फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
अब इस मुद्दे पर नागपुर के कांग्रेस विधायक विकास ठाकरे और नितीन राऊत अपनी भूमिका नागपुरकरों के सामने स्पष्ट करें, ऐसी मांग भी उठ रही है।

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