एक वर्ष से सड़क किनारे रहने को मजबूर 170 परिवारों के तत्काल पुनर्वास की मांग, विधायक विकास ठाकरे ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन!
नागपुर WH NEWS : पश्चिम नागपुर विधानसभा क्षेत्र के राजनगर और संत ज्ञानेश्वर नगर में पिछले 40 से 50 वर्षों से रह रहे 170 से अधिक परिवारों के मकानों को बिना पुनर्वास के ध्वस्त किए जाने के बाद ये परिवार पिछले एक वर्ष से सड़क और नालों के किनारे खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे ने बुधवार को जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद से मुलाकात कर प्रभावित परिवारों के तत्काल पुनर्वास की मांग की।

विधायक ठाकरे ने बताया कि इस संबंध में हाल ही में आयोजित जिला नियोजन समिति की बैठक में उन्होंने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद पालकमंत्री ने जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में विधायक ठाकरे प्रभावित झुग्गीवासियों के साथ जिलाधिकारी से मिले और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नागपुर महानगरपालिका, नागपुर सुधार प्रन्यास (एनआईटी) तथा म्हाडा द्वारा विकसित आवास योजनाओं में इन परिवारों का तत्काल पुनर्वास करने की मांग की।
विधायक ठाकरे ने अपने ज्ञापन में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(ई) नागरिकों को देश में कहीं भी निवास करने का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में किसी भी नागरिक, विशेषकर झुग्गीवासियों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए बिना उनके मकान तोड़ना उनके मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने बताया कि मानकापुर स्थित संत ज्ञानेश्वर नगर में लगभग 85 परिवार पिछले 50 वर्षों से रह रहे थे। वहीं राजनगर में करीब 82 परिवार पिछले 40 वर्षों से निवास कर रहे थे। संत ज्ञानेश्वर नगर की झुग्गियों को रेलवे परियोजना के लिए तथा राजनगर की झुग्गियों को अग्निशमन महाविद्यालय के निर्माण के लिए बिना पुनर्वास के हटाया गया। विधायक का आरोप है कि यह कार्रवाई संविधान की भावना तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।
विधायक विकास ठाकरे ने यह भी बताया कि पश्चिम नागपुर के झिंगाबाई टाकली स्थित आदर्श नगर और ताजनगर की झुग्गियों को भी इसी प्रकार बिना पुनर्वास के हटाया गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इन सभी प्रभावित परिवारों का मानवीय आधार पर तत्काल पुनर्वास किया जाए, ताकि उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिल सके।
