उपोषण की चेतावनी! रिटायर्ड सैनिक पर हमले के मामले में सही धाराएं न लगाने का आरोप, पुलिस थाने के सामने अनशन की तैयारी!
हिंगणा :(गजानन ढाकुलकर)
वानाडोंगरी में गोपाल तुकाराम ठाकरे पर हुए कथित हमले और लूट के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। शुरुआत में इसे केवल मारपीट और लूट का मामला माना जा रहा था, लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह हमला पहले से रची गई साजिश का हिस्सा था?

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमले से पहले ही उन्हें धमकियां दी गई थीं और इस संबंध में संबंधित पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद समय पर कोई ठोस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है कि यदि पुलिस ने पहले ही उचित कदम उठाए होते, तो क्या यह हमला टाला जा सकता था?
घटना में सोने की चेन, मोबाइल और चश्मा छीनने का आरोप है। इस मामले में सतीश भाऊराव शहाकार, सागर सतीश शहाकार, स्वप्नील सतीश शहाकार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि धमकी के बाद सुनियोजित तरीके से हमला किया गया, तो मामले की गंभीरता और बढ़ सकती है। ऐसे में साजिश रचने, जान से मारने की कोशिश, जबरन लूट, धमकी और सामूहिक हमला जैसी कड़ी धाराएं लगाई जा सकती हैं।
इधर, गोपाल तुकाराम ठाकरे ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित धाराएं नहीं लगाई गईं, तो वे पुलिस स्टेशन के सामने अनशन पर बैठेंगे। इस चेतावनी के बाद मामला सामाजिक और राजनीतिक रूप से और गरमा गया है।
फिलहाल सबकी नजरें पुलिस जांच, सीसीटीवी फुटेज, पहले की शिकायतों और धमकी के रिकॉर्ड पर टिकी हैं। अब जांच से ही साफ होगा कि यह अचानक हुआ विवाद था या पहले से रची गई साजिश।
