नागपुर में दलित परिवार के घर पर पुलिसवाले ने चलाया बुलडोजर!अबतक मामला दर्ज क्यो नहीं पीडितो का सवाल ?
– मामला पहुंचा राष्ट्रीय अनुसूचित जाती आयोग!
– नागपूर सीपी को नोटीस जारी… सवालो के घेरे में सीपी रवींद्र सिंघल!
नागपुर | WH NEWS प्रतिनिधि
महाराष्ट्र में 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली आंबेडकर जयंती से ठीक एक दिन पहले नागपुर के जरीपटका इलाके में एक दलित परिवार का एक पुलिस द्वारा घर तोड़े जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित स्मिता रविंद्र वासनिक के परिवार ने आरोप लगाया है कि 13 अप्रैल को उनके घर पर बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की गई व बेघर कर दिया. इसकी शिकायत जरीपटका थाने में देने गये लेकीन अबतक शिकायत दर्ज नहीं कि.

मामला ऍट्रॉसिटी ऍक्ट का हैं. पीडित परिवार में इस संदर्भ में पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंघल को भी शिकायत कि लेकिन आयुक्त ने भी मामले को गंभीर नही समजा.
परिवार का दावा है कि इस कार्रवाई में एक पुलिसकर्मी की भूमिका रही, जबकि मामला न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, घर की खरीदी विधिवत नोटरी के आधार पर की गई थी, ऐसे में कानूनी प्रक्रिया के बिना तोड़फोड़ कैसे हुई—यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।

इस पूरे मामले में जरीपटका पुलिस स्टेशन में शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया गया है। वहीं, नागपुर पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंघल पर भी कार्रवाई न करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाती आयोग (National Commission for Scheduled Castes) ने संज्ञान लेते हुए नागपुर पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है और 30 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के अनुसार, यह हाल के समय में पुलिस आयुक्त को जारी किया गया दूसरा नोटिस है। इससे पहले पत्रकार विजय खवसे के मामले में भी आयोग ने नोटिस भेजा हैं ।

भीम सेना के अध्यक्ष श्रीधर साळवे ने इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “जनता को न्याय दिलाने वाली व्यवस्था ही अगर सवालों के घेरे में आ जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।”
इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक माहौल को भी गरमा दिया है, क्योंकि नागपुर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में दलित परिवार के घर पर कार्रवाई के आरोपों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। घटना स्थल को भन्ते हर्षबोधी ने भी भेट दी और कडी कारवाई कि मांग कि. घर गिराने वाले पर कारवाई नहीं कि गई तो आंदोलन कि चेतावनी दी. अब यह मामला तुल पकड रहा हैं और सीधे नागपूर पुलिस पर सवाल खडे हो रहे हैं. इस मामले को लेकरं अब दलित संघटना भी आगे आ रही हैं. पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी घटना स्थल को भेट कर मामले को गंभीरता से लेकर कारवाई कि मांग कि.

पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए उच्च न्यायालय जाने की बात कही है, वहीं इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।अब देखना यह हैं कि पुलिस आयुक्त इस मामले में क्या आदेश करते इसकी और सभी कि नजरे लगी हैं.
