नागपुर में “हल्ला बोल” से मचा हड़कंप — ओवरलोडिंग और RTO भ्रष्टाचार पर बड़ा खुलासा, राष्ट्रवादी काँग्रेस शरद पवार के नेता धडके RTO ऑफिस!
नागपुर | WH NEWS 22 अप्रैल 2026
नागपुर में ओवरलोडिंग, अवैध यात्री परिवहन और आर.टी.ओ. विभाग में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आज बड़ा राजनीतिक विस्फोट देखने को मिला। राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) ने नागपुर ग्रामीण आर.टी.ओ. (MH-40) कार्यालय पर जोरदार “हल्ला बोल” आंदोलन कर प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया।
सुबह 11 बजे कामठी रोड स्थित आर.टी.ओ. कार्यालय के बाहर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और प्रादेशिक परिवहन अधिकारी विजय चौहान का घेराव किया। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरलोड वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठा है।
संगठन की ओर से दिए गए निवेदन में दावा किया गया कि हैं कि ओवरलोडिंग के कारण लगातार घातक दुर्घटनाएं हो रही हैं.
-निर्दोष लोगों की जान जा रही है
-आर.टी.ओ. कार्यालय में एजेंटों के जरिए अवैध वसूली और भ्रष्टाचार का खेल जारी है
हाल ही में गोंदिया में ओवरलोड रेत से भरे वाहन की दुर्घटना में 14 वर्षीय बालक की मौत का उदाहरण देते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। चंद्रपुर की घटनाओं का भी उल्लेख कर इसे “प्रशासनिक लापरवाही” बताया गया।
“एंट्री के नाम पर वसूली” — बड़ा आरोप
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश कार्याध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि
“एंट्री के नाम पर पैसे लेकर अधिकारी दलालों के माध्यम से भ्रष्टाचार कर रहे हैं, जो सीधे-सीधे जनता की जान से खिलवाड़ है।”
प्रशासन को खुली चेतावनी
नेताओं ने साफ कहा कि अगर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। साथ ही यातायात व्यवस्था में पारदर्शिता और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस आंदोलन में संगठन के कई पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया।यह मामला कई गंभीर कानूनी प्रावधानों से जुड़ा हो सकता है:
-ओवरलोडिंग: मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत दंडनीय अपराध
अवैध वसूली/भ्रष्टाचार: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत जांच योग्य
लापरवाही से मौत: भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराएं लागू हो सकती हैं
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई संभव है।
नागपुर में उठी यह आवाज सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी मांग बनकर सामने आई है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।
