स्वदेशी और स्वालंभन भारत के लिए देश के मूल्यों पर आधारित अर्थव्यवस्था समय की जरूरत: शंकरानन्द

स्वदेशी और स्वालंभन भारत के लिए देश के मूल्यों पर आधारित अर्थव्यवस्था समय की जरूरत: शंकरानन्द

नागपूर – भारतीय अर्थव्यवस्था व समाज का भारतीयकरण करने के उद्देश्य से हमारी पढ़ाई में आध्यात्मिक आधारित भारतीय अर्थशास्त्र पढ़ाना समय की आवश्यकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, भारतीय शिक्षण मंडल और स्वाधीनता ग्राम विकास एंड पीस फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय अर्थशास्त्र संस्था के स्थापना की घोषणा हई। इस संस्था और रिसर्च सेंटर के स्थापना की घोषणा के कार्यक्रम के अध्यक्ष भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री श्री शंकारानंद जी ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आर्थिक सोच स्पष्ट थी कि अगर भारत देश को मजबूत और स्वालंबन बनाना है तो हमारे भारत देश की संस्कृति सभ्यता राष्ट्रवादी नीतिगत मूल्य पर आधारित आर्थिक दोहरन स्वीकारना ही होगा।

स्वदेशी अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमने कभी हार नहीं स्वीकार की, इसलिए हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यदि शिक्षा, विश्वविद्यालय, कॉरपोरेट सेक्टर और राजनीतिज्ञ मिलकर एक दृष्टि से काम करेंगे तो भारत में नए अर्थशास्त्र की नींव रखी जा सकती है। अर्थशास्त्र और संस्कृति एक ही सिक्के के दो पहलू है। इस उद्देश से देश के प्रथम भारतीय अर्थशास्त्र पर आधारित केंद्र के स्थापना कि उन्होंने घोषणा की।

स्वदेशी और स्वाव्लंबन भारत के लिए श्री दत्तोपंत ठेंगड़ीजी की भूमिका महत्वपूर्ण और अपनाने योग्य है। ऐसा राजकीय और आर्थिक विशेषज्ञ, दिल्ली से आए अरविंद सिंह जी ने अपने मार्गदर्शन में कहा। आगे उन्होंने कहा कि उनकी दूरदष्टि के कारण ही भारत देश को सामाजिक और आर्थिक रचना के लिए योग्य मार्गदर्शन मिला।

स्वाधीनता ग्राम विकास व पीस फाउंडेशन की महामंत्री, अर्थशास्त्र की जानकारी चार्टर्ड अकाउंटेंट श्वेताली ठाकरे ने कहा की 12 मार्च 1930 को ही नमक आंदोलन व स्वदेशी का नारा दिया गया था। उसी तर्ज पर 12 मार्च 2025 को भारतीय शिक्षण मंडल व स्वाधीनता ग्राम विकास व पीस फाऊंडेशन द्वारा 12 मार्च 2025 को दोनों संस्थाओं ने मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था पाठ्यक्रम स्थापित करने का आज संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की मजबूत शक्ति व देश के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय अर्थनीति को व्यवस्था में लाना जरूरी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने
चरखा के माध्यम से स्वदेशी का नारा दिया था। इस तरह हमें अब भारतीय अर्थशास्त्र को अपनाना पड़ेगा।

स्थापति अभिषेक देशपांडे ने कहा कि जिस तरह नागपुर रामदेव बाबा यूनिवर्सिटी व कालेज लुप्त हुए स्थापक वेद की पढ़ाई शुरू हुई है, इस तरह अब समय आ गया है कि विदेशी अर्थशास्त्र के स्थान पर भारतीय अर्थशास्त्र को अपनाया जाए। आज इसकी नींव रखी गई है। उन्होंने आगे कहा कि जैसे प्राचीन काल में भारत के 12 विद्यापीठ में वेद विज्ञान पढ़ाया जाता था, उसी तर्ज पर अब हमें भारतीय अर्थशास्त्र की शिक्षा देनी होगी|
राष्ट्रीय व्यापारी परिषद कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतीया ने कहा कि हमारे देश के बाजारों को विदेशीयों के कब्जे से व उनके माल की बिक्री के षड्यंत्र से हमें बचना का समय आ गया है। भरतिया जी ने आगे कहा कि जैसे अमेरिका के रष्ट्रपति कंपनी अमेरिका फर्स्ट का नारा दिया है, उसी तर्ज पर भारतीय वस्तुएं प्रथम का पालन हम सभी को करना चाहिए। भारत देश विश्व की सबसे बड़ी खपत की मंडी है। इसे अपने हाथ मैं बनाए रखने के लिए हमारे पाठ्यक्रम में भारतीय अर्थशास्त्र लाना समय की जरूरत है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ अभिषेक त्रिपाठी ने किया. आभार शिवजी बघेल ने माना.
कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने में अजय धाकरस जी , डॉ अखिलेश पेशवे जी इंज. अभिजीत ठाकरे जी आदि लोगों का योगदान रहा। प्रमुखता से उपस्थित थे राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्रकुलगुरू डॉ राजेंद्र काकडे
विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान नागपुर के पूर्व संचालक डॉ राजेश पडोळे
रामदेवबाबा विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ राजेश पांडे
जी एच रायसोनी कौशल विकास विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ विवेक कपुर
विदर्भ इंडस्ट्रीज असोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अतुल पांडे
कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरू आचार्य हरेराम त्रिपाठी

 

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