नागपुर पुलिस आयुक्त पर सवाल: NCSC का दूसरा नोटिस, फिर भी चुप्पी क्यों? पत्रकार विजय खवसे मामला पहूँचा दिल्ली!
नागपुर |WH NEWS प्रतिनिधि
नागपुर पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंघल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने पुलिस की कथित निष्क्रियता पर 6 एप्रिल 2026 को दूसरा नोटिस जारी किया है, जो खुद में एक गंभीर संकेत माना जा रहा है।

आयोगाने ने भेजी यह दुसरी नोटीस
सूत्रों के अनुसार, आयोग द्वारा पहले जारी किए गए नोटिस का अब तक कोई जवाब नागपुर पुलिस आयुक्त की ओर से नहीं दिया गया, जिसके चलते आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुनः नोटिस जारी किया है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
मामला पत्रकार विजय सीताराम खवसे से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपने ऊपर दर्ज कथित झूठे मामलों को लेकर आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस द्वारा कार्रवाई निष्पक्ष और न्यायसंगत नहीं रही।पुलीस आयुक्त रवींद्र सिंघल के आदेश पर पुलीस ने झुठे मामले दर्ज किए.
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, अन्यथा आगे की कड़ी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। यह निर्देश यह दर्शाता है कि मामला अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संवैधानिक संस्था की निगरानी में दिल्ली गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
– क्या नागपुर पुलिस जानबूझकर आयोग के निर्देशों की अनदेखी कर रही है?
– या फिर सिस्टम में जवाबदेही का अभाव इतना गहरा हो चुका है कि संवैधानिक संस्थाओं के आदेश भी नजरअंदाज किए जा रहे हैं?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि NCSC के नोटिस को हल्के में लेना गंभीर प्रशासनिक चूक हो सकती है, और यदि समय पर जवाब नहीं दिया गया तो संबंधित पुलीस अधिकारियों पर प्रत्यक्ष कार्रवाई भी संभव है।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि नागपुर पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंघल इस बार क्या रुख अपनाते हैं,
जवाब देंगे या फिर मामला और ज्यादा गंभीर होगा?
पत्रकार विजय खवसे ने दिल्ली से कहा हैं की “जब तक न्याय नहीं मिलेगा, लड़ाई जारी रहेगी” जो अपने हक के लिए संवैधानिक रास्ते पर डटे हुए हैं।
इस मामले में जितने दोषी अधिकारी हैं उनपर कारवाई की मांग खवसे ने की हैं. न्याय नहीं मिला तो हायकोर्ट में जाने की चेतावनी दी.

आयोगने भेजी थी यह पहली नोटीस.. सीपी ने जवाब नहीं दिया!
