नागपुर में कथित पुलिस ज्यादती का मामला: 11 दिन महिला को हिरासत में रखने का आरोप,एड मिश्रा ने कि जांच की मांग! -मामला गया राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग मे! -सीपी साहब शहर के पुलिस पर ध्यान दो जांच कर दोषीयो का निलंबन करो उठी मांग !

नागपुर में कथित पुलिस ज्यादती का मामला: 11 दिन महिला को हिरासत में रखने का आरोप,एड मिश्रा ने कि जांच की मांग!
-मामला गया राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग मे!
-सीपी साहब शहर के पुलिस पर ध्यान दो जांच कर दोषीयो का निलंबन करो उठी मांग !

नागपुर | 22 मार्च 2026 WH NEWS 
नागपुर के यशोधरा नगर क्षेत्र से पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। एक महिला एवं उसके 19 वर्षीय भाई ने आरोप लगाया है कि उन्हें दिनांक 10 मार्च 2026 से 20 मार्च 2026 तक कथित रूप से अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखा गया तथा इस दौरान उनके साथ मारपीट और महिला के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप महिला ने लगाया।
हालांकि, इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। पूरे प्रकरण की पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकेगी।

क्या हैं आरोप?
प्राप्त जानकारी अनुसार एवं पीड़ित पक्ष के कथन के अनुसार, दोनों भाई बहन को एक कथित चोरी के संदेह में यशोधरा नगर पुलिस स्टेशन बुलाया गया था। आरोप है कि उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में रखा गया।
इस संबंध में अधिवक्ता सूरज बी. मिश्रा का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोप!
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट, छेड़छाड़ तथा अपमानजनक व्यवहार किया गया। साथ ही उसके भाई के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है, जिससे उसे चोटें आईं। इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव होगी।

पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप!
पीआई संदीप बुआ नागपूर शहर मे विवादित पीआई के तौर पर जाने जाते हैं.
पीड़ित पक्ष द्वारा पुलिस निरीक्षक संदीप बुवा, PSI नागेश एवं अन्य कर्मियों पर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।

अधिवक्ता मिश्रा के हस्तक्षेप के बाद रिहाई का दावा!
अधिवक्ता सूरज बी. मिश्रा के अनुसार, उनके हस्तक्षेप के बाद 20 मार्च की रात पीड़ितों को रिहा किया गया। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आएगा।और दोषी पुलिस कर्मियो पर कारवाई होंगी.

मानवाधिकार आयोग में शिकायत
इस प्रकरण को लेकर पीड़ित पक्ष द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई है।अब यह मामला दिल्ली तक जाने से इसका जवाब पुलिस आयुक्त को देना पडेंगा.

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मुख्यमंत्री से संज्ञान लेने की मांग
पीड़ित परिवार एवं उनके अधिवक्ता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच के निर्देश देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला नागपुर जैसे प्रमुख शहर में सामने आया है, इसलिए उच्च स्तर पर हस्तक्षेप आवश्यक है।

मुख्य मांगें
-आरोपित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच करें
-जांच पूर्ण होने तक प्रशासनिक कार्रवाई करें
-थाने के CCTV फुटेज सुरक्षित रखा जाए
-मामले कि SIT या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराया जायें.

तत्काल कार्रवाई की मांग
नागपुर पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंघल से मांग की गई है कि मामले की तुरंत प्रारंभिक जांच शुरू कर दोषीयो पर तुरंत कारवाई करें.और 
संबंधित अधिकारियों को जांच पूरी होने तक लाइन अटैच/निलंबित किया जाए.
-सभी CCTV व रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं
-पीड़ित पक्ष को सुरक्षा एवं मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जाए
-कानूनी व प्रशासनिक सवाल
यह मामला पुलिस हिरासत में अधिकारों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न उठाता है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह कानून एवं मानवाधिकार मानकों के उल्लंघन का विषय बन सकता है।
मामले में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। यदि पीड़ित पक्ष को संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिलती है, तो  बॉम्बे हाईकोर्ट के नागपूर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाने कि चेतावनी भी ऍड सूरज मिश्रा ने दि.
अब देखना यह हैं कि पुलिस आयुक्त इस मामले को गंभीरतसे लेते या अपने ही पुलिस का बचाव करते इसकी और सभी कि नजरे लगी हैं.

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